Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.23: अतः हे मद्रराज! आप शीघ्रतापूर्वक रथ को युद्धस्थल में पांचाल, पाण्डव और संजय योद्धाओं की ओर ले चलें। आज या तो मैं युद्धस्थल में उनसे युद्ध करके उनका वध कर दूँगा, अथवा स्वयं द्रोणाचार्य के मार्ग का अनुसरण करते हुए यमलोक को जाऊँगा॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् क्षिप्रं मद्रपते प्रयाहि
रणे पञ्चालान् पाण्डवान् सृञ्जयांश्च।
तान् वा हनिष्यामि समेत्य संख्ये
यास्यामि वा द्रोणपथा यमाय॥ २३॥
अनुवाद
अतः हे मद्रराज! आप शीघ्रतापूर्वक रथ को युद्धस्थल में पांचाल, पाण्डव और संजय योद्धाओं की ओर ले चलें। आज या तो मैं युद्धस्थल में उनसे युद्ध करके उनका वध कर दूँगा, अथवा स्वयं द्रोणाचार्य के मार्ग का अनुसरण करते हुए यमलोक को जाऊँगा॥ 23॥
Therefore, O King of Madra! You should quickly take the chariot towards the Panchalas, Pandavas and Sanjaya warriors in the battlefield. Today, I will either fight with them on the battlefield and kill them or I will myself go to Yamaloka following the path of Dronacharya.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥