Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.20: जो अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी, विष्णु और इन्द्र के समान पराक्रमी और बृहस्पति तथा शुक्राचार्य के समान सदैव धर्मात्मा हैं, इन गुरुदेवों को बचाने के लिए उनके भयंकर अस्त्र-शस्त्र आदि भी उनके निकट नहीं आ सके, अर्थात् उनकी रक्षा नहीं कर सके॥20॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हुताशनादित्यसमानतेजसं
पराक्रमे विष्णुपुरन्दरोपमम्।
नये बृहस्पत्युशनो: सदा समं
न चैनमस्त्रं तदुपास्त दु:सहम्॥ २०॥
अनुवाद
जो अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी, विष्णु और इन्द्र के समान पराक्रमी और बृहस्पति तथा शुक्राचार्य के समान सदैव धर्मात्मा हैं, इन गुरुदेवों को बचाने के लिए उनके भयंकर अस्त्र-शस्त्र आदि भी उनके निकट नहीं आ सके, अर्थात् उनकी रक्षा नहीं कर सके॥20॥
To save these Gurudevs, who are as bright as fire and the sun, as mighty as Vishnu and Indra, and always as righteous as Jupiter and Shukracharya, their dangerous weapons etc. could not come near them, that is, they could not protect them. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥