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mahabharat 8.37.19: निश्चय ही शस्त्र, बल, पराक्रम, कर्म, उत्तम नीति या उत्तम शस्त्र आदि किसी भी मनुष्य को सुख पहुँचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं; क्योंकि ये सब साधन होने पर भी आचार्य युद्ध में शत्रुओं द्वारा मारे गए ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.37.19 
न नूनमस्त्राणि बलं पराक्रम:
क्रिया: सुनीतं परमायुधानि वा।
अलं मनुष्यस्य सुखाय वर्तितुं
तथा हि युद्धे निहत: परैर्गुरु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
निश्चय ही शस्त्र, बल, पराक्रम, कर्म, उत्तम नीति या उत्तम शस्त्र आदि किसी भी मनुष्य को सुख पहुँचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं; क्योंकि ये सब साधन होने पर भी आचार्य युद्ध में शत्रुओं द्वारा मारे गए ॥19॥
 
Certainly weapons, strength, bravery, action, good policy or excellent weapons etc. are not enough to bring happiness to any man; Because despite having all these resources, Acharya was killed by the enemies in the war. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)