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mahabharat 8.37.17: ‘विद्या, सावधानी, बल, धैर्य, उत्तम शस्त्र और शील – ये सभी गुण द्रोणाचार्य में विद्यमान थे। यदि वे महात्मा द्रोण भी मृत्यु के वश में हो जाएँ, तो मैं अन्य सभी लोगों को भी मृत्यु के निकट ही मानता हूँ।’ 17॥   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.37.17 
शिक्षाप्रमादश्च बलं धृतिश्च
द्रोणे महास्त्राणि च संनतिश्च।
स चेदगान्मृत्युवशं महात्मा
सर्वानन्यानातुरानद्य मन्ये॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘विद्या, सावधानी, बल, धैर्य, उत्तम शस्त्र और शील – ये सभी गुण द्रोणाचार्य में विद्यमान थे। यदि वे महात्मा द्रोण भी मृत्यु के वश में हो जाएँ, तो मैं अन्य सभी लोगों को भी मृत्यु के निकट ही मानता हूँ।’ 17॥
 
‘Education, caution, strength, patience, great weapons and modesty – all these virtues were present in Dronacharya. If that Mahatma Drona also falls under the influence of death, then I consider all other people also to be near death. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)