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mahabharat 8.37.16: अतः महायुद्ध में मारे गए द्रोणाचार्य का स्मरण करके मैं सत्य कहता हूँ, हे कौरवों! तुम सब लोग ध्यानपूर्वक सुनो। युद्धस्थल में अर्जुन के वेग का सामना मेरे अतिरिक्त कोई नहीं कर सकता। वह भयानक रूप धारण करके हमारे सामने आया हुआ मृत्यु के समान है॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.37.16 
स संस्मरन् द्रोणमहं महाहवे
ब्रवीमि सत्यं कुरवो निबोधत।
न वा मदन्य: प्रसहेद् रणेऽर्जुनं
समागतं मृत्युमिवोग्ररूपिणम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः महायुद्ध में मारे गए द्रोणाचार्य का स्मरण करके मैं सत्य कहता हूँ, हे कौरवों! तुम सब लोग ध्यानपूर्वक सुनो। युद्धस्थल में अर्जुन के वेग का सामना मेरे अतिरिक्त कोई नहीं कर सकता। वह भयानक रूप धारण करके हमारे सामने आया हुआ मृत्यु के समान है॥ 16॥
 
Therefore, remembering Dronacharya who was killed in the great war, I am telling the truth, O Kauravas! All of you listen carefully. No one except me can withstand the speed of Arjuna in the battlefield. He is like death in a terrifying form that has come in front of us.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)