Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.14: भीष्म और द्रोणाचार्य देवराज इन्द्र और विष्णु के समान पराक्रमी, सबके द्वारा प्रशंसित, रथ, घोड़े और हाथियों को मथने में समर्थ और अविनाशी थे। जब शत्रुओं ने उन्हें भी मार डाला, तब मैं क्या समझूँ? ऐसा सोचकर भी आज युद्धभूमि में मुझे भय नहीं लग रहा है॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म और द्रोणाचार्य देवराज इन्द्र और विष्णु के समान पराक्रमी, सबके द्वारा प्रशंसित, रथ, घोड़े और हाथियों को मथने में समर्थ और अविनाशी थे। जब शत्रुओं ने उन्हें भी मार डाला, तब मैं क्या समझूँ? ऐसा सोचकर भी आज युद्धभूमि में मुझे भय नहीं लग रहा है॥ 14॥
Bhishma and Dronacharya were as valiant as the kings of gods Indra and Vishnu, admired by all, capable of churning chariots, horses and elephants and were indestructible. When the enemies killed them too, what do I count as? Even after thinking this, I am not afraid on the battlefield today.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥