Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.37.13: हे राजन! यदि मैं हाथ में शस्त्र लेकर रथ पर बैठा हूँ, तो यदि वज्रधारी इन्द्र भी क्रोधित होकर आएँ, तो भी मुझे उनसे भय नहीं लगेगा। युद्धभूमि में सदा के लिए सोए हुए भीष्म जैसे महारथियों को देखकर भी मुझमें बेचैनी (घबराहट) दूर रहती है।   |   mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.37.13 
नाहं महेन्द्रादपि वज्रपाणे:
क्रुद्धाद् बिभेम्यायुधवान् रथस्थ:।
दृष्ट्वा हि भीष्मप्रमुखाञ्शयाना-
नतीव मां ह्यस्थिरता जहाति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि मैं हाथ में शस्त्र लेकर रथ पर बैठा हूँ, तो यदि वज्रधारी इन्द्र भी क्रोधित होकर आएँ, तो भी मुझे उनसे भय नहीं लगेगा। युद्धभूमि में सदा के लिए सोए हुए भीष्म जैसे महारथियों को देखकर भी मुझमें बेचैनी (घबराहट) दूर रहती है।
 
O King! If I am sitting on the chariot with weapons in my hands, then even if Indra holding the thunderbolt comes in anger, I will not be afraid of him. Even after seeing the mighty warriors like Bhishma lying asleep on the battlefield forever, restlessness (panic) remains away from me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)