Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.37.10: परन्तु भगवत्-मुग्ध होने के कारण उन्होंने उन कुचक्रों पर ध्यान नहीं दिया। सारथीपुत्र के चले जाने पर सब राजा उसकी जय-जयकार करने लगे। कौरवों को निश्चय हो गया कि अब पाण्डवों की पराजय हो जाएगी॥10॥ | mahabharat अध्याय 8.37: कौरव-सेनामें अपशकुन, कर्णकी आत्मप्रशंसा, शल्यके द्वारा उसका उपहास और अर्जुनके बल-पराक्रमका वर्णन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च तान् गणयामासु: सर्वे दैवेन मोहिता:।
प्रस्थितं सूतपुत्रं च जयेत्यूचुर्नराधिपा:।
निर्जितान् पाण्डवांश्चैव मेनिरे तत्र कौरवा:॥ १०॥
अनुवाद
परन्तु भगवत्-मुग्ध होने के कारण उन्होंने उन कुचक्रों पर ध्यान नहीं दिया। सारथीपुत्र के चले जाने पर सब राजा उसकी जय-जयकार करने लगे। कौरवों को निश्चय हो गया कि अब पाण्डवों की पराजय हो जाएगी॥10॥
But being enchanted by the divine they did not pay any heed to those mischiefs. When the son of a charioteer departed all the kings started hailing him. The Kauravas were sure that now the Pandavas will be defeated.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥