श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 36: कर्णका युद्धके लिये प्रस्थान और शल्यसे उसकी बातचीत  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  8.36.18-19h 
मनोगतं मम ह्यासीद् भीष्मद्रोणौ महारथौ॥ १८॥
अर्जुनं भीमसेनं च निहन्ताराविति ध्रुवम्।
 
 
अनुवाद
मुझे विश्वास था कि महारथी भीष्म और द्रोणाचार्य अर्जुन और भीमसेन को अवश्य मार डालेंगे॥ 18 1/2॥
 
‘I had faith that Maharathi Bhishma and Dronacharya would surely kill Arjun and Bhimasena.॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)