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mahabharat 8.35.8-9: क्योंकि श्रीकृष्ण भी भूत और भविष्य को यथार्थ रूप से जानते हैं। भारत! इस विषय को भली-भाँति जानकर श्रीकृष्ण पार्थ के सारथि हो गए हैं, जैसे ब्रह्माजी रुद्र के सारथि थे। 8-9।   |   mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  8.35.8-9 
अनागतमतिक्रान्तं वेद कृष्णोऽपि तत्त्वत:॥ ८॥
एतदर्थं विदित्वापि सारथ्यमुपजग्मिवान्।
स्वयंभूरिव रुद्रस्य कृष्ण: पार्थस्य भारत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि श्रीकृष्ण भी भूत और भविष्य को यथार्थ रूप से जानते हैं। भारत! इस विषय को भली-भाँति जानकर श्रीकृष्ण पार्थ के सारथि हो गए हैं, जैसे ब्रह्माजी रुद्र के सारथि थे। 8-9।
 
Because Shri Krishna also knows the past and the future in a true sense. Bhaarat! Having known this subject well, Shri Krishna has become the charioteer of Partha just as Brahmaji was the charioteer of Rudra. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)