Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.35.5-7h: शल्य बोले - हे भारत! नरश्रेष्ठ! मैंने भी विद्वानों के मुख से श्रेष्ठ ब्रह्माजी और महादेवजी का यह अलौकिक एवं दिव्य उपाख्यान सुना है कि किस प्रकार पितामह ब्रह्माजी ने महादेवजी का सारथि बनकर कार्य किया था और किस प्रकार एक ही बाण से समस्त दैत्य मारे गये थे। | mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शल्य बोले - हे भारत! नरश्रेष्ठ! मैंने भी विद्वानों के मुख से श्रेष्ठ ब्रह्माजी और महादेवजी का यह अलौकिक एवं दिव्य उपाख्यान सुना है कि किस प्रकार पितामह ब्रह्माजी ने महादेवजी का सारथि बनकर कार्य किया था और किस प्रकार एक ही बाण से समस्त दैत्य मारे गये थे।
Shalya said – India! Narashrestha! I have also heard this supernatural and divine anecdote of the best Brahma and Mahadevji from the mouth of scholars, how Grandfather Brahmaji had acted as the charioteer of Mahadevji and how all the demons were killed with a single arrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥