| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति » श्लोक 44 |
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| | | | श्लोक 8.35.44  | कर्ण उवाच
ईशानस्य यथा ब्रह्मा यथा पार्थस्य केशव:।
तथा नित्यं हिते युक्तो मद्रराज भवस्व न:॥ ४४॥ | | | | | | अनुवाद | | कर्ण ने कहा- मद्रराज! जिस प्रकार ब्रह्माजी महादेवजी के कल्याण के लिए और श्रीकृष्ण अर्जुन के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, उसी प्रकार आप भी हमारे कल्याण में सदैव तत्पर रहें। | | | | Karna said- Madraraj! Just as Brahma is always ready for the welfare of Mahadevji and Shri Krishna for Arjuna, similarly you too should always be engaged in our welfare. | | ✨ ai-generated | | |
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