श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.35.41 
शल्य उवाच
एवं चेन्मन्यसे राजन् गान्धारे प्रियदर्शन।
तस्मात् ते यत् प्रियं किंचित् तत् सर्वं करवाण्यहम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
शल्य बोले - गांधारीपुत्र ! प्रियदर्शनराज ! यदि आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आपका प्रिय कार्य करूँगा ॥ 41॥
 
Shalya said - Gandhari's son! Priyadarshan king! If you think so then I will do whatever is your favourite work. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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