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श्लोक 8.35.41  |
शल्य उवाच
एवं चेन्मन्यसे राजन् गान्धारे प्रियदर्शन।
तस्मात् ते यत् प्रियं किंचित् तत् सर्वं करवाण्यहम्॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| शल्य बोले - गांधारीपुत्र ! प्रियदर्शनराज ! यदि आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आपका प्रिय कार्य करूँगा ॥ 41॥ |
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| Shalya said - Gandhari's son! Priyadarshan king! If you think so then I will do whatever is your favourite work. ॥ 41॥ |
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