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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.35.40 
संजय उवाच
तत: शल्य: परिष्वज्य सुतं ते वाक्यमब्रवीत्।
दुर्योधनममित्रघ्नं प्रीतो मद्राधिपस्तदा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! तब मद्रराज शल्य ने प्रसन्न होकर आपके पुत्र शत्रुसूदन दुर्योधन को गले लगा लिया और कहा। ॥ 40॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Then Madra king Shalya became happy and embraced your son Shatrusudan Duryodhan and said. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)