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mahabharat 8.35.36-37h: तब समस्त अस्त्र-शस्त्रों के संचालन में निपुण परम बुद्धिमान एवं पराक्रमी राजा दुर्योधन ने मद्र देश के राजा पृथ्वीपति शल्य को संबोधित करके मेघ के समान गम्भीर वाणी में कहा, जो उनकी वाणी से उस क्षेत्र में गूंज रही थी - 36 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  8.35.36-37h 
ततो राजा महाप्राज्ञ: सर्वास्त्रकुशलो बली।
दुर्योधनोऽब्रवीच्छल्यं मद्रराजं महीपतिम्॥ ३६॥
पूरयन्निव घोषेण मेघगम्भीरया गिरा।
 
 
अनुवाद
तब समस्त अस्त्र-शस्त्रों के संचालन में निपुण परम बुद्धिमान एवं पराक्रमी राजा दुर्योधन ने मद्र देश के राजा पृथ्वीपति शल्य को संबोधित करके मेघ के समान गम्भीर वाणी में कहा, जो उनकी वाणी से उस क्षेत्र में गूंज रही थी - 36 1/2॥
 
Then the most intelligent and powerful king Duryodhana, skilled in the handling of all weapons, addressed the king of Madra country, Prithvipati Shalya, and said in a voice as solemn as a cloud, resonating in the region with his voice - 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)