श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.35.31 
संजय उवाच
तथेति राजन् पुत्रस्ते सह कर्णेन मारिष।
अब्रवीन्मद्रराजानं सर्वक्षत्रस्य संनिधौ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे माननीय राजन! तब आपके पुत्र ने समस्त क्षत्रियों के समक्ष कर्ण के साथ मद्रराज शल्य से कहा - 'बहुत अच्छा, मैं आपकी शर्त स्वीकार करता हूँ।'
 
Sanjaya says - O honourable king! Then in the presence of all the kshatriyas your son along with Karna said to Madra king Shalya - 'Very good, I accept your condition.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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