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mahabharat 8.35.30: वीर! लेकिन वैकर्तन कर्ण को मेरी एक शर्त पूरी करनी होगी। मेरे मन में जो भी आएगा, मैं उसे बता दूँगा। 30।   |   mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.35.30 
समयश्च हि मे वीर कश्चिद् वैकर्तनं प्रति।
उत्सृजेयं यथाश्रद्धमहं वाचोऽस्य संनिधौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वीर! लेकिन वैकर्तन कर्ण को मेरी एक शर्त पूरी करनी होगी। मेरे मन में जो भी आएगा, मैं उसे बता दूँगा। 30।
 
Brave one! But Vaikartana Karna will have to fulfill one condition of mine. I will tell him whatever comes to my mind. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)