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mahabharat 8.35.24-25h: हे राजन! आपके बल के सामने समस्त सात्वतवंशी क्षत्रिय कभी भी युद्ध में टिक नहीं पाए हैं। क्या श्रीकृष्ण का बल आपके बल से अधिक है?॥24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.35.24-25h 
तव बाहुबलं प्राप्य न शेकु: सर्वसात्वता:॥ २४॥
तव बाहुबलाद् राजन् किं नु कृष्णो बलाधिक:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपके बल के सामने समस्त सात्वतवंशी क्षत्रिय कभी भी युद्ध में टिक नहीं पाए हैं। क्या श्रीकृष्ण का बल आपके बल से अधिक है?॥24 1/2॥
 
‘O King! All the Satvatvanshi Kshatriyas have never been able to stand their ground in battle when faced with your strength. Is Shri Krishna's strength greater than your strength?॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)