श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  8.35.21-22h 
तं कथं पाण्डवा युद्धे विजेष्यन्ति महारथम्॥ २१॥
यो हन्यात् समरे क्रुद्धो वज्रहस्तं पुरंदरम्।
 
 
अनुवाद
जो कुपित होकर युद्धभूमि में वज्रधारी इन्द्र को भी मार डालने की शक्ति रखता है, उस महाबली कर्ण को पाण्डव कैसे परास्त कर सकेंगे?॥ 21/2॥
 
How will the Pandavas defeat that mighty warrior Karna who, when enraged, has the power to kill even the thunderbolt-wielding Indra on the battlefield?॥ 21/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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