श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  8.35.19-20h 
येन वृष्णिप्रवीरस्तु सात्यकि: सात्वतां वर:॥ १९॥
निर्जित्य समरे शूरो विरथश्च बलात् कृत:।
 
 
अनुवाद
‘उसने समरांगण युद्ध में वृष्णिवंश के प्रधान योद्धा वीर सात्यकि को परास्त करके उसे बलपूर्वक रथहीन कर दिया था ॥19 1/2॥
 
‘He had defeated the brave Satyaki, the chief warrior of the Vrishni dynasty, in the battle of Samarangana and had forcefully rendered him chariotless. 19 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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