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mahabharat 8.35.18-19h: महाराज! महासमर में वीर नकुल और सहदेव को परास्त करने के पश्चात् भी किसी विशेष उद्देश्य को ध्यान में रखकर उसने युद्ध में उन दोनों को नहीं मारा।   |   mahabharat अध्याय 8.35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 35: शल्य और दुर्योधनका वार्तालाप, कर्णका सारथि होनेके लिये शल्यकी स्वीकृति  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  8.35.18-19h 
माद्रीपुत्रौ तथा शूरौ येन जित्वा महारणे॥ १८॥
कमप्यर्थं पुरस्कृत्य न हतौ युधि मारिष।
 
 
अनुवाद
महाराज! महासमर में वीर नकुल और सहदेव को परास्त करने के पश्चात् भी किसी विशेष उद्देश्य को ध्यान में रखकर उसने युद्ध में उन दोनों को नहीं मारा।
 
Sir! After defeating the brave Nakul and Sahadev in the great battle, he did not kill both of them in the battle keeping any special purpose in mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)