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mahabharat 8.34.d4h-74h: हे समस्त भाषियों के स्वामी! आप सभी गुणों में श्रेष्ठ हैं; अतः देवताओं के द्रोहियों का वध करने तथा देवताओं की विजय सुनिश्चित करने के लिए आप तुरंत रथ पर आरूढ़ हो जाइए और इन उत्तम घोड़ों को नियंत्रित कीजिए।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक d4h-74h
 
 
श्लोक  8.34.d4h-74h 
त्वं हि देवेश सर्वैस्तु विशिष्टो वदतां वर।)
स रथं तूर्णमारुह्य संयच्छ परमान् हयान्॥ ७३॥
जयाय त्रिदेवेशानां वधाय त्रिदशद्विषाम्।
 
 
अनुवाद
हे समस्त भाषियों के स्वामी! आप सभी गुणों में श्रेष्ठ हैं; अतः देवताओं के द्रोहियों का वध करने तथा देवताओं की विजय सुनिश्चित करने के लिए आप तुरंत रथ पर आरूढ़ हो जाइए और इन उत्तम घोड़ों को नियंत्रित कीजिए।
 
O Lord of all the speakers! You are superior in all qualities; therefore, to kill the traitors of the gods and to ensure victory for the gods, immediately mount the chariot and control these excellent horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)