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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  8.34.d2 
योद्धुं बलेन सत्त्वेन वीर्येण विनयेन च।
अधिक: सारथि: कार्यो नास्ति चान्योऽधिको भवात्॥
 
 
अनुवाद
जो बल, धैर्य, पराक्रम और विनय की दृष्टि से सारथि से श्रेष्ठ हो, उसे ही युद्ध के लिए सारथि बनाना चाहिए; भगवान शिव से श्रेष्ठ कोई नहीं है।
 
‘Only he who is superior to the charioteer in terms of strength, patience, valour and humility should be made the charioteer for the war; there is no one who is superior to Lord Shiva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)