vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना
»
श्लोक d1
श्लोक
8.34.d1
(त्वं देव शक्तो लोकेऽस्मिन् नियन्तुं प्रद्रुतानिमान्।
वेदाश्वान् सोपनिषद: सारथिर्भव न: स्वयम्॥
अनुवाद
हे प्रभु! इस संसार में वेदों और उपनिषदों रूपी इन दौड़ते हुए घोड़ों को केवल आप ही नियंत्रित कर सकते हैं, अतः आप ही इनके सारथी बन जाइए।
O Lord! Only you can control these running horses of Vedas along with Upanishads in this world; therefore you yourself become the charioteer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×