श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  8.34.d1 
(त्वं देव शक्तो लोकेऽस्मिन् नियन्तुं प्रद्रुतानिमान्।
वेदाश्वान् सोपनिषद: सारथिर्भव न: स्वयम्॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इस संसार में वेदों और उपनिषदों रूपी इन दौड़ते हुए घोड़ों को केवल आप ही नियंत्रित कर सकते हैं, अतः आप ही इनके सारथी बन जाइए।
 
O Lord! Only you can control these running horses of Vedas along with Upanishads in this world; therefore you yourself become the charioteer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)