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mahabharat 8.34.99: वहाँ खड़े हुए अन्य राक्षस युद्ध के लिए महादेवजी के सामने आए। महाराज! तब त्रिशूलधारी महादेवजी क्रोधित हो गए॥99॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  8.34.99 
अपरेऽवस्थितास्तत्र युद्धायाभिमुखास्तदा।
तत: स्थाणुर्महाराज शूलधृक् क्रोधमूर्च्छित:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ खड़े हुए अन्य राक्षस युद्ध के लिए महादेवजी के सामने आए। महाराज! तब त्रिशूलधारी महादेवजी क्रोधित हो गए॥99॥
 
The other demons standing there came in front of Mahadevji for battle. Maharaj! Then Mahadevji holding the trident became furious.॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)