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mahabharat 8.34.98: उस वृषभकी भयंकर गर्जना सुनकर देवताओंके शत्रु बहुतसे तारक नामक राक्षस वहीं नष्ट हो गए ॥98॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  8.34.98 
वृषभस्यास्य निनदं श्रुत्वा भयकरं महत्।
विनाशमगमंस्तत्र तारका: सुरशत्रव:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
उस वृषभकी भयंकर गर्जना सुनकर देवताओंके शत्रु बहुतसे तारक नामक राक्षस वहीं नष्ट हो गए ॥98॥
 
Hearing the terrifying roar of that bull, many demons named Taraka, enemies of the gods, were destroyed there and then. ॥98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)