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mahabharat 8.34.97: जब महादेव रथ पर बैठकर त्रिपुरा की ओर बढ़े, तो नंदी बैल ने जोर से दहाड़ लगाई, जिसकी गूंज सभी दिशाओं में गूंज उठी।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  8.34.97 
प्रयाते रथमास्थाय त्रिपुराभिमुखे भवे।
ननाद सुमहानादं वृषभ: पूरयन् दिश:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
जब महादेव रथ पर बैठकर त्रिपुरा की ओर बढ़े, तो नंदी बैल ने जोर से दहाड़ लगाई, जिसकी गूंज सभी दिशाओं में गूंज उठी।
 
When Mahadeva sat on the chariot and proceeded towards Tripura, Nandi the bull roared loudly, echoing in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)