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mahabharat 8.34.93: वर देने वाले भगवान शंकर जब अपने रथ पर बैठे हुए दैत्यों की ओर बढ़े, तब उन्होंने मुस्कुराकर ब्रह्माजी को आशीर्वाद दिया और कहा- ॥93॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  8.34.93 
ततोऽधिरूढे वरदे प्रयाते चासुरान् प्रति।
साधु साध्विति विश्वेश: स्मयमानोऽभ्यभाषत॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
वर देने वाले भगवान शंकर जब अपने रथ पर बैठे हुए दैत्यों की ओर बढ़े, तब उन्होंने मुस्कुराकर ब्रह्माजी को आशीर्वाद दिया और कहा- ॥93॥
 
When the boon-giving Lord Shankar, seated on his chariot, moved towards the demons, he smiled and blessed Lord Brahma and said - ॥93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)