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mahabharat 8.34.91: राजन! ऋषिगण नाना प्रकार के स्तोत्रों का पाठ करते हुए भगवान महादेव की स्तुति कर रहे थे और बार-बार उनकी महिमा बढ़ा रहे थे॥91॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  8.34.91 
ऋषयस्तत्र देवेशं स्तुवन्तो बहुभि: स्तवै:।
तेजश्चास्मै वर्धयन्तो राजन्नासन् पुन: पुन:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
राजन! ऋषिगण नाना प्रकार के स्तोत्रों का पाठ करते हुए भगवान महादेव की स्तुति कर रहे थे और बार-बार उनकी महिमा बढ़ा रहे थे॥91॥
 
King! The sages were reciting various types of hymns and praising the Lord Mahadev and repeatedly increasing his glory. ॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)