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mahabharat 8.34.86-87h: तत्पश्चात् भगवान महादेव समस्त देवताओं से घिरे हुए उस विशाल रथ पर सवार होकर वहाँ से चले, जिसका कोई जोड़ नहीं था।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  8.34.86-87h 
तत: प्रयातो देवेश: सर्वैर्देवगणैर्वृत:॥ ८६॥
रथेन महता राजन्नुपमा नास्ति यस्य ह।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान महादेव समस्त देवताओं से घिरे हुए उस विशाल रथ पर सवार होकर वहाँ से चले, जिसका कोई जोड़ नहीं था।
 
King! Thereafter, Lord Mahadev, surrounded by all the gods, departed from there on that huge chariot which had no parallel. 86 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)