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mahabharat 8.34.82-83h: वर देने वाले महादेवजी तलवार, धनुष और बाण से सुशोभित होकर रथ पर स्थित होकर अपने तेज से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहे थे॥82 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 82-83h
 
 
श्लोक  8.34.82-83h 
स शोभमानो वरद: खड्गी बाणी शरासनी॥ ८२॥
प्रदीपयन् रथे तस्थौ त्रीँल्लोकान् स्वेन तेजसा।
 
 
अनुवाद
वर देने वाले महादेवजी तलवार, धनुष और बाण से सुशोभित होकर रथ पर स्थित होकर अपने तेज से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहे थे॥82 1/2॥
 
Mahadevji, the giver of blessings, adorned with sword, bow and arrow and settled on the chariot, illuminating all the three worlds with his glory. 82 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)