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mahabharat 8.34.80-81h: तत्पश्चात् भगवान् भगवान् विष्णु, चन्द्रमा और अग्नि से उत्पन्न उस बाण को हाथ में लेकर, धनुष से शत्रुओं को कंपाते हुए, उस रथ पर आरूढ़ हुए।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 80-81h
 
 
श्लोक  8.34.80-81h 
ततस्तमिषुमादाय विष्णुसोमाग्निसम्भवम्॥ ८०॥
आरुरोह तदा स्थाणुर्धनुषा कम्पयन् परान्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् भगवान् विष्णु, चन्द्रमा और अग्नि से उत्पन्न उस बाण को हाथ में लेकर, धनुष से शत्रुओं को कंपाते हुए, उस रथ पर आरूढ़ हुए।
 
Then taking in his hand that arrow which had been produced from Vishnu, the Moon and Fire, Mahadeva mounted on that chariot, shaking the enemies with his bow. 80 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)