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mahabharat 8.34.79-80h: तत्पश्चात् वायु के समान वेगवान उन घोड़ों को उठाकर ब्रह्माजी ने महादेवजी से कहा - 'अब आप रथ पर आरूढ़ हो जाइए।'   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 79-80h
 
 
श्लोक  8.34.79-80h 
तत उत्थाप्य भगवांस्तान् हयाननिलोपमान्॥ ७९॥
बभाषे च तदा स्थाणुमारोहेति सुरोत्तम:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वायु के समान वेगवान उन घोड़ों को उठाकर ब्रह्माजी ने महादेवजी से कहा - 'अब आप रथ पर आरूढ़ हो जाइए।'
 
After that, picking up those horses which were as fast as the wind, Lord Brahma said to Mahadevji - 'Now you mount the chariot'. 79 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)