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mahabharat 8.34.74-75h: इस प्रकार देवताओं ने तीनों लोकों के स्वामी ब्रह्माजी को सिर नवाकर उन्हें अपना सारथि बनने के लिए प्रसन्न किया। ऐसा हमने सुना है। 74 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  8.34.74-75h 
इति ते शिरसा गत्वा त्रिलोकेशं पितामहम्॥ ७४॥
देवा: प्रसादयामासु: सारथ्यायेति न: श्रुतम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार देवताओं ने तीनों लोकों के स्वामी ब्रह्माजी को सिर नवाकर उन्हें अपना सारथि बनने के लिए प्रसन्न किया। ऐसा हमने सुना है। 74 1/2
 
In this way the gods bowed their heads before Lord Brahma, the lord of the three worlds, and pleased him to become their charioteer. We have heard of this. 74 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)