Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.70: इसी प्रकार चारों वेद उस महात्मा के उत्तम घोड़े हैं और पर्वतों सहित पृथ्वी उनका उत्तम रथ है। नक्षत्रों की ध्वजा से सुशोभित और घूँघट से विभूषित भगवान शिव उस रथ पर योद्धा सारथि के रूप में विराजमान हैं; किन्तु कोई सारथि दिखाई नहीं देता। | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार चारों वेद उस महात्मा के उत्तम घोड़े हैं और पर्वतों सहित पृथ्वी उनका उत्तम रथ है। नक्षत्रों की ध्वजा से सुशोभित और घूँघट से विभूषित भगवान शिव उस रथ पर योद्धा सारथि के रूप में विराजमान हैं; किन्तु कोई सारथि दिखाई नहीं देता।
‘Similarly, the four Vedas are the excellent horses of that great soul and the earth along with the mountains is his excellent chariot. Lord Shiva, adorned with the flag of the constellations and decorated with a veil, is seated on that chariot as a warrior charioteer; but no charioteer is visible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥