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mahabharat 8.34.65: हे प्रभु! देवताओं के शत्रुओं का दमन करने के विषय में आपने जो कहा था, वैसा ही हमने किया है। भगवान शंकर हम पर प्रसन्न हैं॥65॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  8.34.65 
यथा त्वत्कथितं देव त्रिदशारिविनिग्रहे।
तथा च कृतमस्माभि: प्रसन्नो नो वृषध्वज:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! देवताओं के शत्रुओं का दमन करने के विषय में आपने जो कहा था, वैसा ही हमने किया है। भगवान शंकर हम पर प्रसन्न हैं॥65॥
 
O Lord! We have done exactly as you had said regarding suppressing the enemies of the gods. Lord Shankar is pleased with us. ॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)