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mahabharat 8.34.60-61: ब्रह्मर्षियों द्वारा स्तुति किए हुए, बंदीगणों द्वारा पूजित और नृत्य करती हुई अप्सराओं से विभूषित वरदाता भगवान शिव ने तलवार, बाण और धनुष लेकर देवताओं से हँसकर कहा - 'मेरा सारथि कौन होगा?'॥60-61॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 60-61
 
 
श्लोक  8.34.60-61 
ब्रह्मर्षिभि: स्तूयमानो वन्द्यमानश्च वन्दिभि:।
तथैवाप्सरसां वृन्दैर्नृत्यद्भिर्नृत्यकोविदै:॥ ६०॥
स शोभमानो वरद: खड्गी बाणी शरासनी।
हसन्निवाब्रवीद् देवान् सारथि: को भविष्यति॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षियों द्वारा स्तुति किए हुए, बंदीगणों द्वारा पूजित और नृत्य करती हुई अप्सराओं से विभूषित वरदाता भगवान शिव ने तलवार, बाण और धनुष लेकर देवताओं से हँसकर कहा - 'मेरा सारथि कौन होगा?'॥60-61॥
 
Praised by the brahmarshis, worshipped by the prisoners and adorned with the dancing Apsaras, the boon-giving Lord Shiva, taking up sword, arrow and bow, smilingly addressed the gods, ‘Who will be my charioteer?’॥ 60-61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)