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mahabharat 8.34.58: तब दैत्यों का संहार करने के लिए प्रयत्नशील महादेवजी ने देवताओं को भी भयभीत कर दिया और पृथ्वी को कंपाते हुए उस रथ को रोक दिया और उस पर चढ़ने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.34.58 
तमास्थाय महादेवस्त्रासयन् दैवतान्यपि।
आरुरोह तदा यत्त: कम्पयन्निव मेदिनीम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
तब दैत्यों का संहार करने के लिए प्रयत्नशील महादेवजी ने देवताओं को भी भयभीत कर दिया और पृथ्वी को कंपाते हुए उस रथ को रोक दिया और उस पर चढ़ने लगे।
 
Then Mahadeva, striving to kill the demons, frightened even the gods and trembling the earth, stopped that chariot and began to climb on it. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)