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mahabharat 8.34.57: राजन! प्रभु! उस समय देवताओं ने पवित्र सुगन्धि को धारण करने वाले परमदेव वायु को वायु चलाने के लिए नियुक्त किया ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  8.34.57 
तस्य राजंस्तदा देवा: कल्पयाञ्चक्रिरे प्रभो।
पुण्यगन्धवहं राजन् श्वसनं देवसत्तमम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
राजन! प्रभु! उस समय देवताओं ने पवित्र सुगन्धि को धारण करने वाले परमदेव वायु को वायु चलाने के लिए नियुक्त किया ॥57॥
 
Rajan! Lord! At that time, the Gods appointed Vayu, the supreme god who carries sacred fragrance, to blow the air for them. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)