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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना
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श्लोक 55
श्लोक
8.34.55
तस्याङ्गानि समाश्रित्य स्थितं विश्वमिदं जगत्।
जङ्गमाजङ्गमं राजन् शुशुभेऽद्भुतदर्शनम्॥ ५५॥
अनुवाद
हे राजन! यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत्, जो अद्भुत प्रतीत होता है, उन्हीं के पाँच तत्त्वों का आश्रय लेकर स्थित और सुशोभित है ॥ 55॥
O King! This entire animate and inanimate world, which appears wonderful, exists and is decorated only by taking shelter of His five elements. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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