Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.34.54: उनके रथ आदि उत्तम कोटि के थे, शत्रुओं को परास्त करने में समर्थ थे, अत्यन्त बलशाली थे, भयंकर रूप वाले थे और मन के समान तीव्र थे। उनसे घिरे हुए भगवान शिव अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  8.34.54 
प्रमाथिभिर्भीमबलैर्भीमरूपैर्मनोजवै:।
विभाति भगवान् स्थाणुस्तैरेवात्मगुणैर्वृत:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उनके रथ आदि उत्तम कोटि के थे, शत्रुओं को परास्त करने में समर्थ थे, अत्यन्त बलशाली थे, भयंकर रूप वाले थे और मन के समान तीव्र थे। उनसे घिरे हुए भगवान शिव अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे।
 
The chariots etc. that they used were of excellent quality, they were capable of defeating the enemies, they were extremely powerful, had a terrible form and were as quick as the mind. Surrounded by them, Lord Shiva was looking very beautiful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)