Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.52: तत्पश्चात् धूम्रवर्ण, व्याघ्रचर्म धारण करने वाले, देवताओं के लिए निर्भय और दानवों के लिए भय उत्पन्न करने वाले, हजारों सूर्यों के समान नील-लाल रंग के प्रकाश वाले भगवान शिवजी तेज ज्वालाओं से आच्छादित होकर चमकने लगे॥52॥ | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स नीललोहितो धूम्र: कृत्तिवासाभयंकर:।
आदित्यायुतसंकाशस्तेजोज्वालावृतो ज्वलन्॥ ५२॥
अनुवाद
तत्पश्चात् धूम्रवर्ण, व्याघ्रचर्म धारण करने वाले, देवताओं के लिए निर्भय और दानवों के लिए भय उत्पन्न करने वाले, हजारों सूर्यों के समान नील-लाल रंग के प्रकाश वाले भगवान शिवजी तेज ज्वालाओं से आच्छादित होकर चमकने लगे॥52॥
After that, Lord Shiva, smoky, wearing tiger skin, fearless to the gods and terrifying to the demons, and glowing blue-red like thousands of suns, started to shine, covered with bright flames. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥