Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.5: हे जगत के स्वामी! आपकी कृपा से सम्पूर्ण जगत सुखपूर्वक उन्नति कर रहा है। आप ही रक्षक हैं, इसीलिए हम आपकी शरण में आए हैं॥5॥ | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वत्प्रसादाज्जगत् सर्वं सुखमैधत मानद।
शरण्यस्त्वं हि लोकेश ते वयं शरणं गता:॥ ५॥
अनुवाद
हे जगत के स्वामी! आपकी कृपा से सम्पूर्ण जगत सुखपूर्वक उन्नति कर रहा है। आप ही रक्षक हैं, इसीलिए हम आपकी शरण में आए हैं॥5॥
Honourable! The entire world has been happily prospering due to your blessings, O Lord of the world! You are the only protector; that is why we have come to your refuge.'॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥