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mahabharat 8.34.43: तत्पश्चात् ब्रह्मदण्ड, कालदण्ड, रुद्रदण्ड और ज्वर उस रथ के पार्श्व रक्षक बने और चारों ओर अस्त्र-शस्त्र लेकर खड़े हो गए ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.34.43 
ब्रह्मदण्ड: कालदण्डो रुद्रदण्डस्तथा ज्वर:।
परिस्कन्दा रथस्यासन् सर्वतोदिशमुद्यता:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ब्रह्मदण्ड, कालदण्ड, रुद्रदण्ड और ज्वर उस रथ के पार्श्व रक्षक बने और चारों ओर अस्त्र-शस्त्र लेकर खड़े हो गए ॥43॥
 
After that, Brahmadanda, Kaaldanda, Rudradanda and Jwar became the side guards of that chariot and stood all around with weapons. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)