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mahabharat 8.34.39-40: माननीय! वह रथ क्या था? वह तो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का एकत्रित प्रकाश था। उसे बनते देख सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए। तब उन्होंने महात्मा महादेवजी से निवेदन किया कि रथ तैयार है। 39-40।   |   mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  8.34.39-40 
क्लृप्तं तु तं रथं दृष्ट्वा विस्मिता देवताऽभवन्॥ ३९॥
सर्वलोकस्य तेजांसि दृष्ट्वैकस्थानि मारिष।
युक्तं निवेदयामासुर्देवास्तस्मै महात्मने॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
माननीय! वह रथ क्या था? वह तो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का एकत्रित प्रकाश था। उसे बनते देख सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए। तब उन्होंने महात्मा महादेवजी से निवेदन किया कि रथ तैयार है। 39-40।
 
Honorable! What was that chariot? It was the entire universe's light gathered together. Seeing it being built, all the gods were surprised. Then they requested Mahatma Mahadevji that the chariot is ready. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)