Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.38-39h: चमचमाता स्वर्णिम मेरु पर्वत रथ का ध्वज-स्तंभ बना हुआ था। बिजली से सजे बादल ध्वजाओं की तरह चमक रहे थे, जो यजुर्वेदी पुजारियों के बीच स्थापित अग्नि की तरह चमक रहे थे। | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चमचमाता स्वर्णिम मेरु पर्वत रथ का ध्वज-स्तंभ बना हुआ था। बिजली से सजे बादल ध्वजाओं की तरह चमक रहे थे, जो यजुर्वेदी पुजारियों के बीच स्थापित अग्नि की तरह चमक रहे थे।
The glittering golden Mount Meru formed the flag pole of the chariot. The clouds decorated with lightning acted as banners which shone like the fires placed amongst the Yajurvedi priests.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥