Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.36: पूर्वकाल में महादेव के यज्ञ में जिस महान आत्मा की उत्पत्ति हुई थी, वही वर्ष उनका धनुष बना और सावित्री उस धनुष की प्रत्यंचा बनी जिससे उस धनुष की तीव्र ध्वनि उत्पन्न हुई। | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो यज्ञे विहित: पूर्वमीशानस्य महात्मन:।
संवत्सरो धनुस्तद् वै सावित्री ज्या महास्वना॥ ३६॥
अनुवाद
पूर्वकाल में महादेव के यज्ञ में जिस महान आत्मा की उत्पत्ति हुई थी, वही वर्ष उनका धनुष बना और सावित्री उस धनुष की प्रत्यंचा बनी जिससे उस धनुष की तीव्र ध्वनि उत्पन्न हुई।
The great soul that was created in the sacrifice of Mahadeva in the past, that very year became his bow and Savitri became the string that produced the loud sound of that bow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥