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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.34.35 
वषट्कार: प्रतोदोऽभूद् गायत्री शीर्षबन्धना॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वषट्कारा घोड़ों का चाबुक बन गया और गायत्री रथ के ऊपरी भाग को बांधने वाली रस्सी बन गई। 35.
 
Vashatkāra became the whip of the horses and Gayatri became the binding rope for the upper part of the chariot. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)