Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.31: जो आकाश ग्रह, नक्षत्र और तारों से सुशोभित है, तथा जिसमें संध्या, साहस, बुद्धि, स्थिरता और शांति है, उसे चर्म (रथ का बाहरी आवरण) बनाया गया। ॥31॥ | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संध्यां धृतिं च मेधां च स्थितिं संनतिमेव च।
ग्रहनक्षत्रताराभिश्चर्म चित्रं नभस्तलम्॥ ३१॥
अनुवाद
जो आकाश ग्रह, नक्षत्र और तारों से सुशोभित है, तथा जिसमें संध्या, साहस, बुद्धि, स्थिरता और शांति है, उसे चर्म (रथ का बाहरी आवरण) बनाया गया। ॥31॥
The sky, which is adorned with the planets, constellations and stars, along with the evening, courage, intelligence, stability and calmness, was made into a skin (the outer cover of the chariot). ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥