Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.34.29-30: स्वर्ग को भी जूए में स्थान दिया गया। प्रलयकाल के मेघों को ब्रह्माण्ड की त्वचा बनाया गया। कल्पवृक्ष, नहुष, कर्कोटक, धनंजय आदि नागों को घोड़ों के केश बाँधने के लिए रस्सियाँ बनाया गया। दिशाओं और दिशाओं ने भी रथ में जुते घोड़ों की लगाम का रूप धारण किया। | mahabharat अध्याय 8.34: दुर्योधनका शल्यको शिवके विचित्र रथका विवरण सुनाना और शिवजीद्वारा त्रिपुर-वधका उपाख्यान सुनाना एवं परशुरामजीके द्वारा कर्णको दिव्य अस्त्र मिलनेकी बात कहना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वर्ग को भी जूए में स्थान दिया गया। प्रलयकाल के मेघों को ब्रह्माण्ड की त्वचा बनाया गया। कल्पवृक्ष, नहुष, कर्कोटक, धनंजय आदि नागों को घोड़ों के केश बाँधने के लिए रस्सियाँ बनाया गया। दिशाओं और दिशाओं ने भी रथ में जुते घोड़ों की लगाम का रूप धारण किया।
Heaven was also given a place in the yoke. The clouds of the time of doom were made into the skin of the universe. Kalprishtha, Nahush, Karkotaka, Dhananjay and other serpents were made into ropes to tie the hair of horses. The directions and the directions also took the form of reins of the horses harnessed to the chariot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥